back biting, chugalkhori, a moral story in hindi
चुगलख़ोरी
किसी स्थान पर सरला और सुमन नाम की दो महिलायें अपने -अपने परिवार के साथ रहती थीं। सरला का स्वभाव अत्यंत चुगलखोरी वाला था तथा सुमन भी कुछ कम नही थी। सरला क्यूंकि गरीब थी ,इसकारण उसने तथा उसके पति ने मंदिर में साफ़ -सफाई का कार्य करना शुरू कर दिया। सरला सुबह से मंदिर की साफ -सफाई करती स्नान करती ,पूजा करती जो लोग मंदिर में आते उनको टीका लगाती तथा प्रसाद देती थी। इसके बाद किसके घर में क्या हुआ यह बातें औरतों से पता लगती थी। और इन बातों का खूब आनंद लेती थी। उधर सुमन का पति एक छोटी सी दुकान रखकर अपने परिवार का गुजर -बसर करता था। किन्तु सुमन अपने आप को किसी अमीर से कम न समझती थी ,दिखावे के लिए महँगी चीजें लेती थी और सरला को दिखाती थी। सरला भी कोई बात सुनकर सुमन को बताने पहुँचती थी। दोपहर के समय दोनों सहेलियां मिलकर मोहल्ले में कहाँ क्या हुआ किसकी लड़की घर से चली गयी ,किन -किन व्यक्तियों के बीच लड़ाई हुई ,किन दो पक्षों में मार -पीट हुई ,किस लड़के ने अपने माता -पिता के साथ बुरा व्यवहार किया। ये चुँगली वाली बातें करके खुश होती थीं। इसी तरह वर्ष भर दोनों की दोस्ती चलती रही। सरला हर बात सुमन को बताती थी ,सुमन भी कुछ लोगों की चुँगली सरला से करती थी।
एक दिन ऐसा आता है कि सरला को पता चलता है की उसकी बेटी ने एक लड़के को पसंद कर लिया है,और अपने घरवालों को बिना बताये लड़के के साथ चली जाती है। सरला के जगह -जगह पता करने पर भी उसका पता नहीं चलता है। सरला बहुत दुखी तथा परेशान रहने लगी। सुमन के बार -बार पूँछने पर पहले तो सरला बात को टाल देती है इसके बाद सर पीट -पीट कर रोने लगती है और सुमन से आपबीती सुनाती है सरला को बहुत सी स्त्रियों के सामने अपमानित होना पड़ता है।
इसलिए कहा जाता है कि किसी के लिए गड्ढ़ा नहीं खोदना चाहिए अन्यथा एक दिन व्यक्ति उस गड्ढ़े में खुद गिर जाता है। किसी के दुःख में खुश कभी नहीं होना चाहिए। दूसरों के दुःख में अपनी खुशी नहीं तलाशनी चाहिए अन्यथा एक दिन उससे भी बुरा दिन देखने को मिलता है।

Comments
Post a Comment