Baba Nirliptanand. interesting story in hindi
बाबा निर्लिप्तानंद किसी गांव के छोर पर पीपल के नीचे एक महात्मा जी ने अपना दंड और कमंडल रखा और चेला मन्साराम से कहा ,"वत्स शाम होने वाली है,मैं तो गांव में प्रवेश नहीं करुँगा तू लपककर जा और किसी दुकान से सौदा खरीद ला तो ,भगवान का भोग लगे और प्रसाद पाया जाये। " चेला गांव की ओर चल पड़ा। एक किराने की दुकान पर आटा ,दाल ,नमक और आलू आदि खरीद कर चलने लगा तो ,दुकानदार से न रहा गया,पूछ पड़ा ,"महात्मा जी ,कहाँ के रहने वाले हो। "चेला मुस्कुराया ,"रमता जोगी बहता पानी। बच्चा !साधु का कौन सा घर कौन सा परिवार ?जहाँ वसई तँह सुन्दर देसू। " दुकानदार प्रभावित हुआ ,बोला ,"महात्मा जी आज मेरे गरीबखान...