Posts

Showing posts with the label motivational stories

Baba Nirliptanand. interesting story in hindi

Image
                   बाबा    निर्लिप्तानंद    किसी गांव के छोर पर पीपल के नीचे एक महात्मा जी ने अपना दंड और कमंडल रखा और चेला मन्साराम से कहा ,"वत्स शाम होने वाली है,मैं तो गांव में प्रवेश नहीं करुँगा तू लपककर जा और किसी दुकान से सौदा खरीद ला तो ,भगवान का भोग लगे और प्रसाद पाया जाये। "                                                                         चेला गांव की ओर चल पड़ा। एक किराने की दुकान पर आटा ,दाल ,नमक और आलू आदि खरीद कर चलने लगा तो ,दुकानदार से न रहा गया,पूछ पड़ा ,"महात्मा जी ,कहाँ के रहने वाले हो। "चेला मुस्कुराया ,"रमता जोगी बहता पानी। बच्चा !साधु का कौन सा घर कौन सा परिवार ?जहाँ वसई तँह सुन्दर देसू। "                 दुकानदार प्रभावित हुआ ,बोला ,"महात्मा जी आज मेरे गरीबखान...

little saava. A brave Girl, A heart touching motivational story in hindi

Image
नन्ही सावा   एक बहादुर लड़की                   कथा प्राचीन काल की है। नागचौरी नामक गांव में नागवंशी समुदाय के लोग अमन -चैन से अपना जीवन यापन करते थे। यदि उन्हें कोई गम था,तो सिर्फ एक अभिशाप कि कभी कभार विशाल गरुड़ {एक पक्षी }किसी न किसी निवासी पर आक्रमण करके उसे मारकर खा जाता था। उसी गांव में एक अनाथ लड़की सावा अपने चाचा -चाची के पास रहती थी। उसके माता -पिता को भी गरुड़ ने मारकर खा लिया था। जीवन की इतनी हानि देखकर नागवंशियो ने गरुड़ से समझौता कर लिया था ;जिसके मुताबिक प्रत्येक माह की शुरुआत में गांव के एक सदस्य को गरुड़ का आहार बनने के लिए काली पहाड़ी पर जाना पड़ता था।                 नन्ही सावा को चाचा -चाची के घर काफी मुसीबत का सामना करना पड़ता था। घर का सारा काम करने के बाद भी उसे डांट और मार पड़ती और भूखी प्यासी रहना पड़ता। रात के एकांत में अपने माता-पिता को याद करके सावा खूब रोती थी। माह की शुरुआत थी और चाचा -चाची के घर से गरुड़ के भोजन हेतु किसी को भेजने की बारी आ पहुंची। चाचा -च...

The Diamond Sandals, is a best motivational story in hindi.

Image
हीरे की चप्पलें  (The Diamond Sandals ) The Diamond Sandals  किसी गांव में एक निर्धन लड़की अपने माता पिता के साथ रहती थी। उसका नाम पंखुड़ी था। उसके माता -पिता मधुर स्वभाव के थे ,क्योकिं माता -पिता  का विवाह कम उम्र में हो गया था ,इस कारण पिता अभी नौकरी के लिए प्रयास कर रहे थे। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। किसी तरह से उसके परिवार का भरण -पोषण चल रहा था। उसकी माँ दिनभर मेहनत मजदूरी करती थी,और पिता पूरी मेहनत से नौकरी की तलाश में इधर -उधर भटक रहे थे पर उन्हे success नहीं मिली। अब पंखुड़ी 5 वर्ष की हो गयी अतः उसका admission घर के पास एक साधारण school में करवाया गया। पंखुड़ी प्रखर बुद्धि की थी,सदैव अपने school  में प्रथम आती थी ,teachers उसकी प्रशंसा करते थे। गरीब होने के कारण उसके पास एक ही फ्रॉक थी तथा पैरों में चप्पलें भी नहीं थी। school में पंखुड़ी के साथ की लड़कियां तरह-तरह के रंगबिरंगे कपडे एवं चप्पलें पहन कर आती थीं। पंखुड़ी मन ही मन सोचती थी कि उसके पास भी कई रंगबिरंगे कपडे तथा चप्पलें हों वह माँ से ये चीजे मांगती थी तो माँ कहती ''तुम्हारे ...