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Showing posts from February, 2018

khubsurat farista, this story is all about helping others, who are needy.

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खूबसूरत फरिश्ता  दोस्तो आज की स्पर्धाभरी जिंदगी में हमारे पास दूसरों के साथ बिताने के लिये कुछ पल भी नहीं मिल पाते हैं। हम अपनी जिंदगी में अपने सपनों को पूरा करने में इस कदर खो जाते हैं कि हमें अपनों के साथ के लिये समय नहीं मिल पाता है तो दूसरों के लिये समय निकालना बहुत दूर की बात है। आज हमारे पास रुपया -पैसा चाहे जितना हमने कमा लिया हो ,किन्तु जब हम शांत मन से सोचते हैं तो स्वयं को अकेला ही पाते हैं।          क्या वास्तव में हमारे पास दूसरों के लिये कुछ पल भी नहीं है?आइये इस घटना के माध्यम से जानते हैं।  शाम का समय था। राजधानी की सड़के बारिस से भीगी हुयी थीं। सड़क पर गाड़ियों का अम्बार लगा हुआ था। ऐसे समय में एक व्यक्ति अपने साथ एक महिला को अपनी मोटरसाइकिल के पीछे की सीट पर बैठाकर चला जा रहा था। महिला देखने में प्रौढ़ तथा अच्छे कपड़े और अच्छे -अच्छे कीमती गहने पहने हुयी थी। कुछ देर तक सड़क पर सफर करने के बाद अचानक चौराहा आया और चौराहे पर बहुत ही ज्यादा भीड़ थी। इसी भीड़ में कहीं से दूसरा मोटरसाइकिल सवार गाड़ी पार करने की कोशिश करता है इतने म...

Four thugs in Hoshiyarpur.Interesting story in hindi.

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चार ठग  चार ठग किसी किसान को ठगने की नियत से एक गांव में प्रवेश किये। गांव का नाम था होशियारपुर। गांव के प्रवेश मार्ग पर एक दस साल का बालक अकेला खेल रहा था। ठगों ने बालक से उसका नाम पूछा तो बालक ने अपना नाम बताया -हरिहारअहार  ठगों को बालक के घुमावदार नाम पर बड़ा आश्चर्य हुआ। एक ठग ने पूछा ,"बेटा,तुम्हारे पिता घर पर है ?"हरि ने बताया कि उसके पिता घर पर नहीं थे ;स्वर्ग का पानी बराने गये थे। ठगों द्वारा माँ के लिए पूछने पर हरि ने बताया कि उसकी माँ पाप -पुण्य का हिसाब करने गयी थी। घर पर कौन है पूछने पर हरि ने बताया "नयी माँ भी घर पर नहीं है। एक में दो करने गयी है। "              ठगों को हरि के उत्तर से बड़ा आश्चर्य हुआ। ठगो ने कहा ,"अरे हरि !तुमने पहचाना नही ,हम चारों तुम्हारे मामा हैं। "               हरि खुशी से चारो को अपने घर ले गया। एक औरत सर पर अरहर की दाल की टोकरी लेकर ठीक उसी वक्त पहुंची। हरि ने बताया कि यही औरत उसकी नयी माँ थी। ठगों ने उस औरत से कहा ,"तुम्हारा बेटा तो बड़ा सयाना है,तुम कहाँ...

back biting, chugalkhori, a moral story in hindi

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चुगलख़ोरी   किसी स्थान पर सरला और सुमन नाम की दो महिलायें अपने -अपने परिवार के साथ रहती थीं। सरला का स्वभाव अत्यंत चुगलखोरी वाला था तथा सुमन भी कुछ कम नही थी। सरला क्यूंकि गरीब थी ,इसकारण उसने तथा उसके पति ने मंदिर में साफ़ -सफाई का कार्य करना शुरू कर दिया। सरला सुबह से मंदिर की साफ -सफाई करती स्नान करती ,पूजा करती जो लोग मंदिर में आते उनको टीका लगाती तथा प्रसाद देती थी। इसके बाद किसके घर में क्या हुआ यह बातें औरतों  से पता लगती थी। और इन बातों का खूब आनंद लेती थी। उधर सुमन का पति एक छोटी सी दुकान रखकर अपने परिवार का गुजर -बसर करता था। किन्तु सुमन अपने आप को किसी अमीर से कम न समझती थी ,दिखावे के लिए महँगी चीजें लेती थी और सरला को दिखाती थी। सरला भी कोई बात सुनकर सुमन को बताने पहुँचती थी। दोपहर के समय दोनों सहेलियां मिलकर मोहल्ले में कहाँ क्या हुआ किसकी लड़की घर से चली गयी ,किन -किन व्यक्तियों के बीच लड़ाई हुई ,किन दो पक्षों में मार -पीट हुई ,किस लड़के ने अपने माता -पिता के साथ बुरा व्यवहार किया। ये चुँगली वाली बातें करके खुश होती थीं। इसी तरह वर्ष भर दोनों की दोस्ती चलती...